मक्का में कीट प्रबंधन गाइड: 25-30 दिन का सही स्प्रे शेड्यूल
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मक्का में कीट प्रबंधन गाइड: 25-30 दिन का सही स्प्रे शेड्यूल
फॉल आर्मीवर्म और तना छेदक से मक्का बचाने के लिए सही समय पर सही स्प्रे पूरी जानकारी हिंदी में।
मक्का में कीट नियंत्रण का सबसे सही समय बुवाई के 25 से 30 दिन बाद होता है, जब फॉल आर्मीवर्म और तना छेदक की सुंडी पत्तों की गोफ (whorl) में एक्टिव होकर सबसे ज़्यादा नुकसान करती है। इस स्टेज पर Emamectin Benzoate 5% SG और Lambda Cyhalothrin 5% EC की सही मात्रा में छिड़काव कीट को कंट्रोल कर लेता है और Kala Amrit फसल को तुरंत रिकवर होने में मदद करता है।
मक्का की फसल में सबसे ज़्यादा नुकसान करने वाले कीट कौन-कौन से हैं?
मक्का की फसल में शुरुआती 45 दिनों में सबसे ज़्यादा खतरा इन 4 कीटों से रहता है:
- फॉल आर्मीवर्म (Fall Armyworm): पत्तों की गोफ में बैठकर पत्ते को छलनी जैसा बना देती है, इसे पहचानना सबसे ज़रूरी है।
- तना छेदक (Stem Borer): तने के अंदर घुसकर बीच का हिस्सा खा जाता है, जिससे "डेड हार्ट" यानी बीच की पत्ती सूखकर मर जाती है।
- शूट फ्लाई (Shoot Fly): छोटे पौधों के शुरुआती दिनों में प्रकोप करती है, गोभ को अंदर से खोखला कर देती है।
- माहू / एफिड (Aphid): पत्तों और गोफ का रस चूसती है, पौधे की ग्रोथ रुक जाती है।
इनमें फॉल आर्मीवर्म और तना छेदक सबसे ज़्यादा नुकसानदायक माने जाते हैं और इन्हीं दो कीटों पर 25-30 दिन का स्प्रे शेड्यूल सीधा असर करता है।
ये कीट कब और क्यों हमला करते हैं?
फॉल आर्मीवर्म का मादा पतंगा पत्तों की निचली सतह पर अंडे देती है। 3-4 दिन में अंडे से सुंडी निकलकर सीधे पत्तों की गोफ में घुस जाती है, जहां दवा का सीधा संपर्क मुश्किल होता है इसलिए समय पर स्प्रे करना ज़रूरी है।
- गर्म और उमस भरा मौसम इन कीटों के लिए अनुकूल होता है।
- लगातार बारिश के बाद धूप निकलने पर प्रकोप तेज़ी से बढ़ता है।
- 25-30 दिन की अवस्था में फसल की गोफ (whorl) पूरी तरह विकसित हो चुकी होती है, जो सुंडी के छिपने के लिए सबसे सुरक्षित जगह बन जाती है।
समय पर नियंत्रण न करने पर कितना नुकसान होता है?
अगर 25-30 दिन की क्रिटिकल स्टेज पर छिड़काव नहीं किया जाता, तो नुकसान तेज़ी से बढ़ता है:
- अकेले फॉल आर्मीवर्म से उपज में 20-50% तक की कमी हो सकती है।
- तना छेदक से "डेड हार्ट" बनने पर पौधा पूरी तरह बर्बाद हो जाता है, वह कभी भुट्टा नहीं देता।
- सुंडी जितनी बड़ी होती जाती है, उतना ही अंदर घुसकर छिप जाती है फिर स्प्रे का असर कम हो जाता है।
मक्का कीट प्रबंधन: 25 से 30 दिन का स्प्रे शेड्यूल
स्टेज: बुवाई के 25 से 30 दिन बाद (एक स्प्रे)नीचे दी गई टंकी मिक्स स्प्रे से फॉल आर्मीवर्म और तना छेदक दोनों पर नियंत्रण मिलता है, साथ ही फसल को तुरंत रिकवरी भी मिलती है।
| दवा का नाम | मात्रा प्रति एकड़ | काम |
|---|---|---|
| Krishikranti Emaan — Emamectin Benzoate 5% SG | 100 ग्राम | फॉल आर्मीवर्म व अन्य सुंडी पर तेज़ असर |
| Kala Amrit (Humic Acid) | 500 ग्राम | तनाव से रिकवरी, जड़ व ग्रोथ बूस्टर |
| Krishikranti Lambda Knight — Lambda Cyhalothrin 5% EC | 250 मिली | चूसक व चबाने वाले कीटों पर ब्रॉड-स्पेक्ट्रम कंट्रोल |
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स्प्रे करने का सही तरीका
- तीनों दवाओं को 150-200 लीटर पानी प्रति एकड़ में अच्छी तरह घोल लें।
- सबसे पहले Emaan (Emamectin Benzoate) घोलें, फिर Kala Amrit मिलाएं, आखिर में Lambda Knight डालें।
- स्प्रे हमेशा सुबह जल्दी या शाम को करें, तेज़ धूप में स्प्रे का असर कम हो जाता है।
- नोज़ल को सीधे पत्तों की गोफ (whorl) की तरफ करें, क्योंकि सुंडी वहीं छिपती है।
- स्प्रे के 4-6 घंटे बाद बारिश होने की संभावना हो तो छिड़काव टालें।
आगे बचाव के लिए क्या करें?
- निगरानी: बुवाई के 15वें दिन से हफ्ते में 2 बार खेत का निरीक्षण करें, पत्तों पर छोटे छेद दिखते ही सतर्क हो जाएं।
- फेरोमोन ट्रैप: फॉल आर्मीवर्म के पतंगों की निगरानी के लिए खेत में फेरोमोन ट्रैप लगाएं।
- साफ-सफाई: पिछली फसल के ठूंठ और खरपतवार नष्ट करें, इनमें कीट का प्रकोप छिपा रहता है।
- संतुलित पोषण: Kala Amrit जैसे humic acid उत्पाद फसल की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं, जिससे कीट का असर कम होता है।
- रोटेशन: लगातार एक ही ग्रुप की दवा का इस्तेमाल न करें, इससे कीट में प्रतिरोधकता (resistance) बनती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
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