मूंगफली रोग नियंत्रण गाइड: पूरा स्प्रे शेड्यूल

मूंगफली में कॉलर रॉट, टिक्का रोग (लीफ स्पॉट) और रस्ट (गेरुआ)  ये तीन रोग सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं। सही समय पर सही दवा डालने से इनका असर 70% तक कम हो सकता है। नीचे बुवाई से 30, 45 और 60 दिन के हिसाब से पूरा स्प्रे शेड्यूल दिया गया है।

मूंगफली के मुख्य रोग की पहचान कैसे करें?

1. कॉलर रॉट (जड़ गलन / सीडलिंग ब्लाइट)

यह रोग Aspergillus niger फफूंद से होता है और पौधे के जमने के 20-30 दिन के अंदर आता है। तने का जमीन से सटा हिस्सा (कॉलर) काला पड़कर सड़ने लगता है, पौधा मुरझाकर गिर जाता है। यह मिट्टी जनित रोग है, यानी बीमारी जमीन में ही रहती है।

2. टिक्का रोग / लीफ स्पॉट (Early व Late Leaf Spot)

बुवाई के करीब 30-45 दिन बाद पत्तों पर छोटे भूरे-काले गोल धब्बे दिखते हैं, चारों तरफ पीला घेरा बनता है। बाद में धब्बे बड़े होकर आपस में मिल जाते हैं और पत्ते झड़ने लगते हैं। नमी और गर्म मौसम में यह रोग तेजी से फैलता है।

3. रस्ट (गेरुआ रोग)

पत्तों की निचली सतह पर छोटे नारंगी-भूरे फुंसी जैसे उभार (पस्ट्यूल) बनते हैं। यह अक्सर टिक्का रोग के साथ मिलकर हमला करता है और पॉड डेवलपमेंट स्टेज (45-60 दिन) पर सबसे ज्यादा नुकसान करता है।

ये रोग क्यों होते हैं?

लगातार बारिश, ज्यादा नमी और खेत में पिछली फसल का बचा हुआ कचरा  इन तीनों रोगों को बढ़ावा देते हैं। कॉलर रॉट हल्की, रेतीली मिट्टी और बीज-जनित संक्रमण से ज्यादा आता है। टिक्का और रस्ट गर्म-नम मौसम (25-30°C, ज्यादा उमस) में तेज फैलते हैं।

फसल को कितना नुकसान होता है?

अकेले टिक्का और रस्ट रोग मिलकर मूंगफली की पैदावार में 50-70% तक कमी ला सकते हैं। कॉलर रॉट से खेत में पौधों की गिनती (प्लांट स्टैंड) कम हो जाती है, जिससे शुरुआत से ही उत्पादन घट जाता है।

मूंगफली में स्प्रे शेड्यूल : फसल अवस्था अनुसार पूरी तालिका

नीचे दिया शेड्यूल तीन क्रिटिकल स्टेज पर बना है  हर स्टेज पर अलग रोग का खतरा सबसे ज्यादा रहता है, इसलिए दवा भी उसी हिसाब से बदलती है।

फसल अवस्था समय (DAS) किस रोग के लिए दवा मात्रा (प्रति एकड़) तरीका
प्रारंभिक वानस्पतिक अवस्था 30 DAS कॉलर रॉट / जड़ गलन Trichoderma viride (बायो-फफूंदनाशक) 2 किलो जड़ के पास ड्रेंच (मिट्टी में डालें)
पेगिंग से पॉड डेवलपमेंट 45 DAS टिक्का रोग (लीफ स्पॉट) Mancozeb 75% WP 500 ग्राम पत्तों पर स्प्रे
पॉड डेवलपमेंट 60 DAS रस्ट + बचा हुआ टिक्का रोग Propi 25 (Propiconazole 25% EC) 250 मिली पत्तों पर स्प्रे

यह शेड्यूल इस तरह क्यों बनाया गया है?

  • 30 DAS पर Trichoderma viride : यह जैविक फफूंदनाशक जड़ के आसपास सुरक्षा कवच बनाता है, इसलिए कॉलर रॉट शुरू होने से पहले ही ड्रेंच कर देना चाहिए।
  • 45 DAS पर Mancozeb 75% WP : यह कॉन्टैक्ट फफूंदनाशक है, टिक्का रोग के पहले लक्षण दिखते ही पत्तों पर स्प्रे से इसे फैलने से रोकता है।
  • 60 DAS पर Propi 25 : यह सिस्टमिक फफूंदनाशक है, पौधे के अंदर जाकर काम करता है, इसलिए पॉड डेवलपमेंट के समय रस्ट और बचे हुए टिक्का रोग दोनों को कंट्रोल करता है।

बचाव के लिए जरूरी उपाय

  • बुवाई से पहले बीज को फफूंदनाशक से उपचारित करें।
  • फसल चक्र अपनाएं  लगातार एक ही खेत में मूंगफली न लें।
  • खेत में पिछली फसल का कचरा और खरपतवार साफ रखें।
  • ज्यादा नमी वाले मौसम में स्प्रे शेड्यूल में देरी न करें।
  • ऊपर बताई मात्रा प्रति एकड़ के हिसाब से 150-200 लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

मूंगफली में कॉलर रॉट कैसे रोकें?

बुवाई के 30 दिन के अंदर Trichoderma viride को जड़ के पास ड्रेंच करें। यह मिट्टी में फफूंद को बढ़ने से रोकता है और शुरुआत में ही सुरक्षा देता है।

टिक्का रोग की पहचान कैसे करें?

पत्तों पर भूरे-काले गोल धब्बे बनते हैं जिनके चारों तरफ पीला घेरा होता है। यह आमतौर पर बुवाई के 30-45 दिन बाद दिखना शुरू होता है।

मूंगफली में रस्ट रोग के लिए कौन सी दवा अच्छी है?

Propiconazole 25% EC (Propi 25) रस्ट और टिक्का रोग दोनों पर असरदार है क्योंकि यह सिस्टमिक फफूंदनाशक है और पौधे के अंदर तक काम करता है।

मूंगफली में स्प्रे कब-कब करना चाहिए?

तीन मुख्य समय हैं  30 DAS (जड़ में Trichoderma ड्रेंच), 45 DAS (Mancozeb स्प्रे टिक्का रोग के लिए), और 60 DAS (Propi 25 स्प्रे रस्ट के लिए)।

क्या Trichoderma viride और रासायनिक फफूंदनाशक एक साथ इस्तेमाल कर सकते हैं?

हां, अलग-अलग समय पर इस्तेमाल करने पर दोनों सुरक्षित तरीके से काम करते हैं। शेड्यूल में Trichoderma शुरुआती स्टेज पर और रासायनिक दवा बाद की स्टेज पर दी जाती है, इसलिए कोई टकराव नहीं होता।

जुड़े हुए उत्पाद और अन्य गाइड

मूंगफली के लिए सभी फफूंदनाशक एक जगह देखें: Fungicide for Groundnut Collection

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