मूंगफली में पत्ती धब्बा (टिक्का) रोग: लक्षण और दवा
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मूंगफली में पत्ती धब्बा रोग को टिक्का रोग भी कहते हैं। यह एक फफूंद (fungus) जनित रोग है, जो पत्तियों पर भूरे-काले गोल धब्बे बनाता है। बारिश और नमी के मौसम में यह सबसे तेज़ी से फैलता है। समय पर रोका न जाए तो पत्तियाँ झड़ जाती हैं और पैदावार 50% तक गिर सकती है। नीचे पहचान, कारण और बुवाई के बाद 35 से 70 दिन तक का सही स्प्रे शेड्यूल दिया गया है।
पत्ती धब्बा रोग क्या है और कैसे पहचानें?
पत्ती धब्बा रोग दो तरह का होता है अगेती (early) और पछेती (late) leaf spot।
अगेती धब्बा: Cercospora arachidicola फफूंद से होता है। पत्ती के ऊपरी सतह पर भूरे गोल धब्बे बनते हैं, जिनके चारों ओर पीला घेरा (yellow halo) दिखता है।
पछेती धब्बा: Cercosporidium personatum फफूंद से होता है। धब्बे छोटे, गहरे काले और बिना पीले घेरे के होते हैं, ज़्यादातर पत्ती की निचली सतह पर।
पहचान के मुख्य लक्षण:
- पहले नीचे की पुरानी पत्तियों पर धब्बे आते हैं।
- धब्बे आपस में मिलकर बड़े हो जाते हैं।
- पत्तियाँ पीली होकर सूखती और झड़ती हैं।
- गंभीर अवस्था में तना और डंठल पर भी धब्बे आ जाते हैं।
मूंगफली में पत्ती धब्बा रोग क्यों होता है?
यह रोग गर्म और नम मौसम में पनपता है इसलिए मानसून में सबसे ज़्यादा फैलता है।
- तापमान 25–30°C इस फफूंद के लिए सबसे अनुकूल है।
- 85% से ज़्यादा नमी और लगातार बारिश रोग को बढ़ाती है।
- घनी फसल और हवा न लगने से पत्तियों के बीच नमी रुकती है।
- रोग के बीजाणु (spores) पुराने फसल अवशेष में रहते हैं और हवा-बारिश से फैलते हैं।
लक्षण आमतौर पर बुवाई के 40–50 दिन बाद दिखने लगते हैं, इसलिए बचाव की दवा पहले से शुरू करनी ज़रूरी है। यह रोग अक्सर मूंगफली की शुरुआती कीट समस्याओं के साथ-साथ आता है, इसलिए फसल की नियमित जाँच करें।
इस रोग से कितना नुकसान होता है?
पत्ती धब्बा रोग सीधे पैदावार पर असर डालता है।
- पत्तियाँ झड़ने से पौधा भोजन (photosynthesis) नहीं बना पाता।
- फलियाँ कम और छोटी बनती हैं, दाने सिकुड़ जाते हैं।
- भारत में यह रोग 50% से 70% तक उपज घटा सकता है।
इसीलिए इलाज से बेहतर है समय पर बचाव।
मूंगफली में पत्ती धब्बा रोग का नियंत्रण कैसे करें?
1. खेती से बचाव (Cultural)
- फसल चक्र अपनाएँ मूंगफली के बाद अरहर या ज्वार लें।
- खेत से पुराने फसल अवशेष हटाकर नष्ट करें।
- बीज का उपचार करके बोएँ।
- रोग-प्रतिरोधी किस्में लगाएँ।
2. रासायनिक नियंत्रण स्टेज के हिसाब से स्प्रे शेड्यूल
सबसे असरदार तरीका है बुवाई के बाद तय समय पर 3 स्प्रे करना। नीचे शेड्यूल देखें:
| स्प्रे | समय (बुवाई के बाद) | दवा (Molecule) | मात्रा |
|---|---|---|---|
| पहला | 35–40 दिन | RUN CHASE Difenoconazole 25% EC | 250 मि.ली./एकड़ |
| दूसरा | 55–60 दिन | Kindle Carbendazim 46.27% SC | 200–250 मि.ली./एकड़ |
| तीसरा | 65–70 दिन | Rognashak Propiconazole 13.9% + Difenoconazole 13.9% EC | 200–250 मि.ली./एकड़ |
- पहला स्प्रे Difenoconazole 25% EC (RUN CHASE) रोग शुरू होने से पहले बचाव के लिए। फफूंद को जड़ से रोकता है।
- दूसरा स्प्रे Carbendazim 46.27% SC (Kindle) फैल रहे धब्बों को रोकने वाला सिस्टमिक फफूंदनाशक।
- तीसरा स्प्रे Propiconazole + Difenoconazole (Rognashak) पछेती धब्बा और गंभीर संक्रमण के लिए दो-धार वाला कॉम्बिनेशन।
टिप: स्प्रे साफ़ मौसम में करें। बारिश के तुरंत बाद या पहले स्प्रे न करें। दवा बदल-बदल कर डालें ताकि फफूंद में प्रतिरोध (resistance) न बने। पूरी रेंज देखें: मूंगफली के लिए फफूंदनाशक।
पत्ती धब्बा रोग से बचाव के उपाय (Prevention)
- खेत में जल निकासी अच्छी रखें, पानी न रुके।
- पौधों के बीच सही दूरी रखें ताकि हवा लगे।
- संतुलित खाद डालें, ज़्यादा नाइट्रोजन से बचें।
- पहली बारिश के बाद फसल की नियमित जाँच करें।
- रोग दिखने का इंतज़ार न करें शेड्यूल के हिसाब से पहला बचाव स्प्रे समय पर करें।
पत्ती धब्बा रोग के विस्तृत इलाज और सर्वोत्तम फफूंदनाशकों की जानकारी के लिए पढ़ें: मूंगफली में टिक्का रोग नियंत्रण गाइड।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. मूंगफली में पत्ती धब्बा रोग की पहचान कैसे करें?
पत्तियों पर भूरे या काले गोल धब्बे, जिनके चारों ओर पीला घेरा हो, इस रोग की पहचान हैं। पहले नीचे की पुरानी पत्तियों पर आते हैं।
2. पत्ती धब्बा और टिक्का रोग में क्या अंतर है?
कोई अंतर नहीं। मूंगफली में पत्ती धब्बा रोग को ही टिक्का रोग कहते हैं।
3. यह रोग किस मौसम में सबसे ज़्यादा फैलता है?
मानसून में, जब तापमान 25–30°C और नमी 85% से ज़्यादा हो। लगातार बारिश रोग को तेज़ी से बढ़ाती है।
4. पहला स्प्रे कब करना चाहिए?
बुवाई के 35–40 दिन बाद, लक्षण दिखने से पहले ही बचाव का पहला स्प्रे करें।
4. पत्ती धब्बा रोग की सबसे अच्छी दवा कौन सी है?
स्टेज के हिसाब से Difenoconazole 25% EC, Carbendazim 46.27% SC और Propiconazole + Difenoconazole का शेड्यूल सबसे असरदार है।
5. क्या यह रोग पैदावार घटाता है?
हाँ। समय पर न रोका जाए तो पत्तियाँ झड़ने से उपज 50–70% तक घट सकती है।