मिर्च में एन्थ्रेक्नोज रोग | Anthracnose in Chilli: Symptoms, Fungicide & Spray Schedule

मिर्च में एन्थ्रेक्नोज रोग | Anthracnose in Chilli: Spray & Fungicide

मिर्च में एन्थ्रेक्नोज (Anthracnose Disease in Chilli) एक खतरनाक फफूंद जनित बीमारी है जो Colletotrichum capsici से होती है। यह मुख्यतः फल पर काले धँसे हुए धब्बे और सड़न के रूप में दिखती है। मानसून में जब तापमान 28°C और नमी 90% से अधिक हो, यह रोग तेजी से फैलता है।

सही समय पर सही फंगीसाइड का 5-स्प्रे शेड्यूल फॉलो करके मिर्च की फसल को एन्थ्रेक्नोज से बचाया जा सकता है और उपज में 20–50% तक के नुकसान को रोका जा सकता है।

एन्थ्रेक्नोज रोग क्या है? (What is Anthracnose of Chilli)

एन्थ्रेक्नोज मिर्च की सबसे गंभीर फंगल बीमारी है। यह Colletotrichum capsici, C. truncatum, C. Gloeosporioides और कई अन्य Colletotrichum प्रजातियों से होती है। भारत में यह रोग लगभग सभी मिर्च उत्पादक राज्यों में पाया जाता है  महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, मध्यप्रदेश और राजस्थान में सबसे अधिक नुकसान करता है।

यह फफूंद बीज में रहती है और पुराने फसल अवशेषों में जीवित रहती है। हवा और बारिश के छींटों से स्वस्थ फलों तक फैलती है। फल पकने की अवस्था में यह सबसे ज्यादा नुकसान करती है।

मुख्य कारक फफूंद: Colletotrichum capsici (सबसे सामान्य), C. truncatum, C. gloeosporioides, C. acutatum  भारत में यही प्रजातियाँ मुख्य रूप से मिर्च को नुकसान पहुँचाती हैं।

मिर्च में एन्थ्रेक्नोज के लक्षण : Chilli Anthracnose Symptoms कैसे पहचानें?

फल पर लक्षण (Fruit Symptoms)  सबसे पहचानने योग्य

  • काले धँसे हुए धब्बे (Dark Sunken Spots)  हरे या पके फल पर गोल काले-भूरे धँसे हुए धब्बे बनते हैं। यह एन्थ्रेक्नोज की सबसे पक्की पहचान है।
  • गोल छल्ले (Concentric Rings)  धब्बों के अंदर बैल-आँख (Bull's Eye) जैसी गोल छल्लेदार आकृति दिखती है।
  • गुलाबी-नारंगी बीजाणु (Salmon Spore Masses)  नम मौसम में धब्बों पर गुलाबी-नारंगी रंग के बीजाणुओं का समूह दिखता है।
  • फल का सड़ना और गिरना संक्रमित फल सड़कर खेत में गिर जाते हैं। बाजार में इनका भाव शून्य हो जाता है।
  • पकी मिर्च पर ज्यादा असर  हरी मिर्च से ज्यादा पकती हुई और पकी लाल मिर्च पर यह रोग तेजी से फैलता है।

शाखाओं पर लक्षण : Dieback Symptoms

  • शाखा की नोक से शुरू होकर नीचे की तरफ नेक्रोसिस (necrosis) फैलती है
  • प्रभावित शाखाएं सूखकर पुआल जैसी हो जाती हैं
  • नेक्रोटिक धब्बों पर काले बिंदु (fungal acervuli) दिखते हैं
  • गंभीर संक्रमण में पूरा पौधा सूख सकता है
 एन्थ्रेक्नोज vs फल बेधक (Fruit Borer) में फर्क: फल बेधक में फल पर छेद दिखता है और अंदर लट (larva) होता है। एन्थ्रेक्नोज में धँसे हुए काले धब्बे होते हैं लेकिन कोई छेद या लट नहीं होती। धब्बे पर गोल छल्ले दिखें तो यह निश्चित रूप से एन्थ्रेक्नोज है।

मिर्च में एन्थ्रेक्नोज क्यों होता है? : Causes & Conditions

  • तापमान: 25–30°C  मानसून का यही तापमान Colletotrichum के लिए सबसे अनुकूल है
  • आर्द्रता: 90–95% Relative Humidity  लगातार बारिश और ओस रोग को तेजी से फैलाती है
  • बीज से संक्रमण (Seed-Borne): यह फफूंद बीज में रहती है  संक्रमित बीज से बीमारी अगली फसल में भी आती है
  • हवा से फैलाव: बीजाणु (Conidia) हवा से उड़कर स्वस्थ फलों तक पहुँचते हैं
  • बारिश के छींटे: बारिश से एक फल से दूसरे फल तक बीजाणु फैलते हैं
  • फसल अवशेष: फफूंद पुरानी फसल की पत्तियों, तनों और फलों में जीवित रहती है
  • फल पकने की अवस्था: फल जितना पकता है, रोग का खतरा उतना बढ़ता है
  • घना रोपण: पौधों के बीच हवा की कमी  नमी बनी रहती है जो फफूंद को बढ़ावा देती है

एन्थ्रेक्नोज से कितना नुकसान होता है? : Yield Loss

मिर्च की फसल में एन्थ्रेक्नोज सबसे अधिक नुकसान करने वाली बीमारियों में से एक है:

संक्रमण स्थिति उपज में नुकसान मुख्य अवस्था
हल्का संक्रमण 10–20% फूल से फल बनने की शुरुआत
मध्यम संक्रमण 20–35% फल विकास अवस्था
गंभीर संक्रमण 35–50% फल पकने की अवस्था
महामारी की स्थिति 50% तक मानसून + फल पकना एकसाथ
स्रोत: ICAR, IntechOpen Research  Anthracnose of Chilli: Status, Diagnosis and Management  भारतीय खेत की परिस्थितियों के अनुसार।

Anthracnose Chilli Fungicide Spray Schedule : कब और क्या स्प्रे करें

मिर्च में एन्थ्रेक्नोज कंट्रोल के लिए रोपाई के बाद 5 चरणों में स्प्रे करना जरूरी है। पहला स्प्रे रोग दिखने से पहले  बचाव के रूप में  करें। नीचे पूरा शेड्यूल दिया गया है:

स्प्रे नं. रोपाई के बाद (दिन) उत्पाद का नाम Molecule डोज़ प्रति एकड़
स्प्रे 1 40–50 दिन Krishikranti Custom Azoxystrobin 11% + Tebuconazole 18.3% SC 250 मिली
स्प्रे 2 55–60 दिन Krishikranti DIZOXY TOP Azoxystrobin 18.2% + Difenoconazole 11.4% SC 250 मिली
स्प्रे 3 65–70 दिन Krishikranti TROBIN Azoxystrobin 23% SC 200–250 मिली
स्प्रे 4 80–85 दिन Krishikranti Rognashak Propiconazole 13.9% + Difenoconazole 13.9% EC 250 मिली
स्प्रे 5 90–100 दिन Krishikranti Safyra Tebuconazole 6.7% + Captan 26.9% SC 2 मिली / लीटर पानी
नोट: स्प्रे हमेशा सुबह 9 बजे से पहले या शाम 5 बजे के बाद करें। बारिश के कम से कम 24 घंटे बाद स्प्रे करें। हर स्प्रे में दवा बदलें — एक ही molecule बार-बार न लगाएं  resistance बनता है। टैंक मिक्स से पहले जार टेस्ट जरूर करें।
 महत्वपूर्ण: यह शेड्यूल एन्थ्रेक्नोज के साथ-साथ Powdery Mildew, Leaf Spot और अन्य फफूंद रोगों से भी एकसाथ सुरक्षा देता है। कोई भी स्प्रे न छोड़ें  gap से रोग का cycle टूट नहीं पाता।

स्प्रे शेड्यूल में काम आने वाले उत्पाद  क्या करते हैं और क्यों?

स्प्रे 1 : Krishikranti Custom (Azoxystrobin 11% + Tebuconazole 18.3% SC)

यह Systemic dual-action फंगीसाइड है। Azoxystrobin Strobilurin वर्ग का है जो फफूंद की श्वसन क्रिया (Mitochondrial respiration) को रोकता है। Tebuconazole Triazole वर्ग का है जो Sterol Biosynthesis को रोककर फफूंद को बढ़ने से रोकता है। रोपाई के 40–50 दिन बाद पहला preventive स्प्रे  जब फूल आना शुरू हों।

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स्प्रे 2 : Krishikranti DIZOXY TOP (Azoxystrobin 18.2% + Difenoconazole 11.4% SC)

Azoxystrobin उच्च सांद्रता में फफूंद को systematic रूप से नष्ट करता है। Difenoconazole DMI फंगीसाइड है जो Colletotrichum के cell membrane को destroy करता है। 55–60 दिन पर फल बनना शुरू होने पर यह spray रोग को fruit infection से पहले रोकता है।

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स्प्रे 3 : Krishikranti TROBIN (Azoxystrobin 23% SC)

Azoxystrobin 23% SC उच्च सांद्रता वाला Systemic Strobilurin फंगीसाइड है। 65–70 दिन पर फल विकास के शुरुआती दौर में यह spray पत्तियों और फलों दोनों को protect करता है। यह Translaminarly काम करता है  पत्ते के अंदर जाकर दोनों तरफ से सुरक्षा देता है।

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स्प्रे 4 : Krishikranti Rognashak (Propiconazole 13.9% + Difenoconazole 13.9% EC)

यह दोहरे Triazole का combination है। Propiconazole और Difenoconazole दोनों DMI (Demethylation Inhibitors) हैं : ये फफूंद के Ergosterol synthesis को रोकते हैं। 80–85 दिन पर फल पकने की शुरुआत में यह spray सबसे जरूरी है क्योंकि इसी समय Colletotrichum का attack सबसे ज्यादा होता है।

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स्प्रे 5 : Krishikranti Safyra (Tebuconazole 6.7% + Captan 26.9% SC)

Tebuconazole systemic triazole है जो अंदर से काम करता है। Captan broad-spectrum contact फंगीसाइड है जो बाहरी बीजाणुओं को नष्ट करता है। 90–100 दिन पर harvesting के करीब यह अंतिम spray contact + systemic dual protection देता है। Captan की वजह से resistance होने की संभावना भी कम रहती है।

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रासायनिक स्प्रे के साथ क्या करें? : Cultural Management और बचाव

  • रोग-मुक्त बीज लें  हमेशा certified, treated बीज से नर्सरी तैयार करें  संक्रमित बीज से बीमारी अगली फसल तक जाती है
  • बीज उपचार (Seed Treatment)  बुवाई से पहले Trichoderma viride @ 5 ग्राम / किलो बीज से उपचार करें
  • पुराने फसल अवशेष हटाएं  पिछली फसल की पत्तियाँ, तने और सड़े फल खेत से निकालकर जला दें  ये रोग के primary source हैं
  • फसल चक्र (Crop Rotation)  3–4 साल तक एक ही खेत में मिर्च न लगाएं  Solanaceous crops (टमाटर, बैंगन, आलू) भी avoid करें
  • उचित दूरी रखें  पौधों के बीच पर्याप्त दूरी  हवा लगे, नमी न रुके
  • जल निकासी बनाएं खेत में पानी न रुके  waterlogging से रोग बढ़ता है
  • जल्दी तुड़ाई करें जब disease pressure ज्यादा हो तो पूरी तरह पकने से पहले ही तुड़ाई करें
  • बारिश के बाद निरीक्षण  मानसून में हर 3–4 दिन में फसल देखें  पहले लक्षण पर तुरंत spray करें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल : Chilli Anthracnose FAQ

मिर्च में एन्थ्रेक्नोज रोग के लक्षण क्या हैं? (Chilli anthracnose symptoms)

मिर्च के फल पर काले गहरे धँसे हुए धब्बे बनते हैं जिनमें गोल छल्ले (concentric rings) दिखते हैं। नम मौसम में धब्बों पर गुलाबी-नारंगी बीजाणु दिखते हैं। फल पकने की अवस्था में यह सबसे ज्यादा दिखता है। संक्रमित फल सड़कर गिर जाते हैं। शाखाओं पर Dieback भी हो सकता है।

मिर्च में एन्थ्रेक्नोज के लिए सबसे अच्छा फंगीसाइड कौन सा है?

Azoxystrobin + Tebuconazole SC सबसे प्रभावी पहला स्प्रे है। इसके बाद Azoxystrobin + Difenoconazole SC, Azoxystrobin 23% SC, Propiconazole + Difenoconazole EC, और Tebuconazole + Captan SC का 5-स्प्रे शेड्यूल सबसे असरदार है। हर बार अलग molecule use करें — resistance से बचें।

मिर्च में एन्थ्रेक्नोज स्प्रे कब करें? (Anthracnose chilli spray timing)

पहला स्प्रे रोपाई के 40–50 दिन बाद करें। दूसरा 55–60 दिन बाद। तीसरा 65–70 दिन बाद। चौथा 80–85 दिन बाद। पाँचवाँ 90–100 दिन बाद करें। स्प्रे सुबह 9 बजे से पहले या शाम 5 बजे के बाद  बारिश के 24 घंटे बाद करें।

मिर्च में एन्थ्रेक्नोज से कितना नुकसान होता है?

भारत में मिर्च की फसल में एन्थ्रेक्नोज से 20–50% तक उपज का नुकसान हो सकता है। मानसून में जब तापमान 28°C और आर्द्रता 90% से अधिक हो, यह रोग तेजी से फैलता है और पूरी फसल को नुकसान पहुँचा सकता है।

क्या एन्थ्रेक्नोज बीज से फैलता है?

हाँ। Colletotrichum capsici एक Seed-Borne fungus है। संक्रमित बीज से अगली फसल में भी बीमारी आ सकती है। हमेशा certified disease-free treated बीज का उपयोग करें। बुवाई से पहले Trichoderma viride से बीज उपचार करें।

मिर्च में कौन सी बीमारियाँ एन्थ्रेक्नोज जैसी दिखती हैं?

Bacterial Spot में भी काले धब्बे आते हैं लेकिन वे पानी-भीगे (water-soaked) दिखते हैं और धँसे नहीं होते। Fruit Borer में छेद और लट दिखती है। एन्थ्रेक्नोज में धँसे हुए धब्बे और गोल छल्ले होते हैं | यह सबसे पक्की पहचान है।

क्या एन्थ्रेक्नोज organic तरीके से control किया जा सकता है?

Trichoderma viride और Pseudomonas fluorescens seed treatment के रूप में कुछ हद तक preventive protection देते हैं। Copper-based fungicides भी उपयोगी हैं। लेकिन गंभीर monsoon infection में chemical fungicide spray schedule ही reliable control देता है।

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