PRABAL M-45 Mancozeb 75% WP fungicide for protecting crops from fungal diseases during the rainy season, showing diseased crops on one side and healthy green crops on the other.

Mancozeb 75% WP% WP (कृषिक्रांति PRABAL-45) मानसून फसलों में उपयोग: डोज़, रोग और स्प्रे गाइड

मैंकोज़ेब 75% WP बरसात के मौसम में सबसे ज़्यादा भरोसे वाली कॉन्टैक्ट फफूंदनाशक (fungicide) है। यह एक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम, प्रोटेक्टिव फफूंदनाशक है जो आलू-टमाटर के अगेती/पछेती झुलसा (early/late blight) से लेकर धान के ब्लास्ट रोग तक, 10+ फसलों के फफूंद रोगों को रोकती है। कृषिक्रांति PRABAL-45 में इसी मैंकोज़ेब 75% WP का इस्तेमाल 600-800 ग्राम प्रति एकड़ की डोज़ पर किया जाता है।

इस गाइड में आपको मिलेगा: किस फसल में कौन-सा रोग लगता है, कब स्प्रे करना है, और कौन-सी गलतियाँ नहीं करनी हैं।

कृषिक्रांति PRABAL-45 Mancozeb 75% WP
WP अभी खरीदें  प्रोडक्ट पेज पर पूरी जानकारी और सटीक डोज़ चार्ट देखें

यह प्लेसहोल्डर लिंक है  प्रोडक्ट पेज पब्लिश होने के बाद असली स्लग से बदलें।

मैंकोज़ेब 75% WP क्या है?

मैंकोज़ेब एक डाइथायोकार्बामेट ग्रुप (M03) की कॉन्टैक्ट/प्रोटेक्टिव फफूंदनाशक है  मतलब यह पौधे के बाहर एक रक्षा-कवच (protective layer) बनाती है और फफूंद के बीजाणुओं (spores) को अंकुरित होने से पहले ही रोक देती है।

  • प्रकार: कॉन्टैक्ट (सिस्टेमिक नहीं): इसलिए यह बारिश में धुलने के बाद दोबारा स्प्रे माँगती है
  • प्रतिरोध (resistance) का खतरा: बहुत कम क्योंकि यह फफूंद कोशिका के कई बिंदुओं पर काम करती है, इसी वजह से यह 50+ साल से इस्तेमाल हो रही है और प्रतिरोध विकसित नहीं हुआ
  • अतिरिक्त फायदा: इसमें मैंगनीज़ और ज़िंक भी होता है, जो पौधे की हरी-भरी बढ़वार में मदद करता है

किस फसल में कौन-सा रोग नियंत्रित होता है

फसल रोग कब दिखता है
आलू अगेती झुलसा (Early blight), पछेती झुलसा (Late blight) बारिश के तुरंत बाद, नम मौसम में
टमाटर अगेती झुलसा, पछेती झुलसा फल लगने की अवस्था के आसपास
धान ब्लास्ट, ब्राउन स्पॉट कल्ले फूटने से बाली निकलने तक
गेहूं पत्ती रतुआ (Leaf rust), तना रतुआ (Stem rust), करनाल बंट ठंडा-नम मौसम
अंगूर डाउनी मिल्ड्यू, एन्थ्रेक्नोज मानसून और ओस वाले दिनों में
मिर्च फल सड़न (Fruit rot), पत्ती धब्बा रोग फूल आने से फल लगने तक
मूंगफली टिक्का (पत्ती धब्बा रोग), रतुआ पीक मानसून (जुलाई-अगस्त)
सेब स्कैब ठंडा, नम बसंत-मानसून मौसम
कपास, धान, तंबाकू और सब्ज़ी-फल फसलें पत्ती धब्बा, झुलसा प्रकार के रोग अधिक नमी वाले समय में

बरसात के मौसम में फफूंद रोग क्यों बढ़ते हैं

फफूंद रोग नमी और तापमान के मेल से फैलते हैं:

  • लगातार बारिश + पत्तियों पर पानी रुकना = बीजाणु (spore) अंकुरण के लिए सही हालात
  • कम धूप और ज़्यादा नमी फफूंद को तेज़ी से बढ़ने देती है
  • घनी बुवाई और कम हवा-पानी का निकास (drainage) खतरा और बढ़ा देते हैं

यही वजह है कि मानसून फसलों में निवारक (preventive) स्प्रे शेड्यूल बहुत ज़रूरी होता है  रोग दिखने का इंतज़ार करना नुकसान बढ़ा देता है।

न रोका तो कितना नुकसान होता है

  • अगेती/पछेती झुलसा से आलू-टमाटर में 30-50% तक उपज का नुकसान हो सकता है अगर स्प्रे समय पर नहीं हुआ
  • धान का ब्लास्ट अगर बाली को नुकसान पहुँचाए तो दाना भरने में सीधा असर पड़ता है
  • मूंगफली में टिक्का और रतुआ पत्तियाँ झाड़ने (defoliation) का काम करते हैं  जिससे फली का विकास रुक जाता है
  • अंगूर में डाउनी मिल्ड्यू बेल और गुच्छे दोनों को नुकसान पहुँचाता है, बाज़ार में गुणवत्ता गिर जाती है

प्रबंधन: क्या करें

1. कृषि क्रियाएं / निवारक उपाय

  • खेत में पानी न रुके  उचित जल निकास रखें
  • बहुत घनी बुवाई से बचें, हवा-पानी का निकास ज़रूरी है
  • रोगग्रस्त पत्ती-फल तुरंत हटा दें, खेत में न छोड़ें
  • फसल चक्र अपनाएं  एक ही जगह बार-बार संवेदनशील फसल न लगाएं

2. रासायनिक नियंत्रण  मैंकोज़ेब 75% WP (कृषिक्रांति PRABAL-45)

डोज़: 600–800 ग्राम प्रति एकड़ (पानी की मात्रा फसल और स्प्रेयर के हिसाब से समायोजित करें)

स्प्रे कब करें:

  • रोग आने से पहले या शुरुआती अवस्था में ही शुरू करें  निवारक स्प्रे सबसे असरदार होता है
  • नम मौसम रहने तक हर 7-10 दिन के अंतराल पर दोहराएं
  • बारिश के तुरंत बाद स्प्रे न करें  पहले पत्तियों को सूखने दें

स्प्रे विधि:

  • साफ पानी में पहले घोल (paste) तैयार करें, फिर टैंक में डालें
  • पूरे पौधे पर  पत्तियों के ऊपर-नीचे दोनों तरफ  कवरेज ज़रूरी है
  • सुबह या शाम के ठंडे समय स्प्रे करें, तेज़ धूप में नहीं
पूरी लेबल जानकारी और प्रति-लीटर सटीक डोज़ के लिए प्रोडक्ट पेज देखें:
कृषिक्रांति PRABAL-45 मैंकोज़ेब 75% WP — प्रोडक्ट पेज

⚠️ यह प्लेसहोल्डर लिंक है  प्रोडक्ट पेज पब्लिश होने के बाद असली स्लग से बदलें।

3. टैंक-मिक्स सावधानी

  • अत्यधिक क्षारीय (alkaline) उत्पादों (जैसे लाइम-सल्फर) के साथ मिश्रण न करें
  • प्रतिरोध प्रबंधन बेहतर रखने के लिए सिस्टेमिक फफूंदनाशक के साथ रोटेशन में उपयोग करें

बचाव / सर्वोत्तम अभ्यास

  • बीज उपचार से शुरुआत करें  नर्सरी अवस्था से ही सुरक्षा मिलती है
  • मौसम पूर्वानुमान देखें  लगातार 3-4 दिन बारिश की आशंका हो तो पहले ही स्प्रे कर लें
  • एक ही फफूंदनाशक बार-बार इस्तेमाल न करें  मैंकोज़ेब को अलग मोड-ऑफ-एक्शन वाली फफूंदनाशक के साथ रोटेट करें
  • स्प्रे का रिकॉर्ड रखें ताकि अंतराल ट्रैक हो सके

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1. मैंकोज़ेब 75% WP किस फसल में उपयोग होती है?

मैंकोज़ेब 75% WP आलू, टमाटर, धान, गेहूं, अंगूर, मिर्च, मूंगफली और सेब जैसी कई फसलों में झुलसा, ब्लास्ट, रतुआ, पत्ती धब्बा और डाउनी मिल्ड्यू जैसे फफूंद रोगों के लिए उपयोग होती है।

प्रश्न 2. कृषिक्रांति PRABAL-45 की डोज़ कितनी है?

प्रति एकड़ 600-800 ग्राम डोज़ की सिफारिश की जाती है। सटीक प्रति-लीटर अनुपात के लिए प्रोडक्ट लेबल या प्रोडक्ट पेज देखें।

प्रश्न 3. मैंकोज़ेब का स्प्रे कब करना चाहिए?

रोग दिखने से पहले या शुरुआती अवस्था में निवारक स्प्रे सबसे असरदार होता है। नम मौसम में हर 7-10 दिन में दोबारा स्प्रे करें।

प्रश्न 4. क्या मैंकोज़ेब बारिश के तुरंत बाद स्प्रे कर सकते हैं?

नहीं। बारिश के तुरंत बाद स्प्रे करने से दवा धुल जाती है। पत्तियों के थोड़ा सूखने का इंतज़ार करें।

प्रश्न 5. धान में ब्लास्ट नियंत्रण के लिए मैंकोज़ेब काफी है?

मैंकोज़ेब ब्लास्ट के खिलाफ सुरक्षा कवच देती है, लेकिन गंभीर प्रकोप में सिस्टेमिक फफूंदनाशक के साथ रोटेशन बेहतर परिणाम देता है। विस्तार से जानने के लिए धान ब्लास्ट नियंत्रण गाइड देखें।

प्रश्न 6. मूंगफली में टिक्का रोग के लिए कौन-सी डोज़ सही है?

मूंगफली में टिक्का और रतुआ दोनों के लिए 600-800 ग्राम/एकड़ डोज़ से निवारक स्प्रे शुरू करें, पीक मानसून (जुलाई-अगस्त) में अंतराल कम रखें। पूरा स्प्रे शेड्यूल यहाँ देखें

संबंधित उत्पाद और गाइड

Back to blog