मूंगफली में कॉलर रॉट: लक्षण, कारण और फफूंदनाशक नियंत्रण
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मूंगफली में कॉलर रॉट रोग को आद्र गलन या अंकुर झुलसा भी कहते हैं। यह एक फफूंद (fungus) जनित रोग है जो Aspergillus niger नामक मिट्टी और बीज-जनित फफूंद से होता है। खरीफ सीजन में बुवाई के बाद पहले 30 दिनों में यह सबसे ज़्यादा नुकसान करता है। समय पर बीजोपचार और सही फफूंदनाशक का छिड़काव न किया जाए तो उपज में 28 से 50% तक की गिरावट आ सकती है।
कॉलर रॉट रोग क्या है और कैसे पहचानें?
कॉलर रॉट दो अवस्थाओं में पौधे पर हमला करता है अंकुरण से पहले और अंकुरण के बाद।
अंकुरण से पहले (Pre-emergence): बीज जमीन में ही सड़ जाते हैं। बीज की ऊपरी सतह पर काले फफूंद के बीजाणु दिखते हैं। बीज का अंदरूनी हिस्सा नरम और पानी जैसा हो जाता है।
अंकुरण के बाद (Post-emergence): बीजपत्रों पर भूरे धब्बे बनते हैं। लक्षण तने के निचले हिस्से तक फैलते हैं।
कॉलर क्षेत्र पर (Collar Region मिट्टी और तने का जोड़): जमीन के पास तने पर भूरे रंग के धब्बे और सड़ा हुआ हिस्सा दिखता है। सफेद से काले रंग का फफूंद तने के पास नज़र आता है। प्रभावित पौधा मुरझाकर गिर जाता है।
बड़े पौधे (Adult Plant): शाखाएं स्थायी रूप से मुरझा जाती हैं। पत्तियां पीली पड़ती हैं। यदि शाखा को खींचें तो वह आसानी से कॉलर क्षेत्र से टूट जाती है।
पहचान में सावधानी: कॉलर रॉट में काला चूर्ण दिखता है। स्टेम रॉट (Sclerotium rolfsii) में सफेद धागे जैसी फफूंद और छोटे भूरे गोल दाने (sclerotia) दिखते हैं। दोनों के लिए दवाइयां अलग हैं पहले सही पहचान करें।
मूंगफली में कॉलर रॉट क्यों होता है?
यह रोग गर्म और नम मौसम में पनपता है इसलिए खरीफ मानसून में सबसे ज़्यादा फैलता है।
- मिट्टी का तापमान 28–35°C इस फफूंद के लिए सबसे अनुकूल है।
- 80% से ज़्यादा नमी और लगातार बारिश रोग को तेज़ी से बढ़ाती है।
- जलभराव और खराब जल निकासी से कॉलर क्षेत्र के पास फफूंद गतिविधि बढ़ती है।
- संक्रमित या बिना उपचार बोया गया बीज रोग का सबसे बड़ा स्रोत है।
- एक ही खेत में बार-बार मूंगफली बोने से मिट्टी में फफूंद का जमाव बढ़ता रहता है।
लक्षण आमतौर पर बुवाई के 7 से 30 दिन के बीच दिखते हैं, इसलिए बचाव का काम बुवाई से ही शुरू करना ज़रूरी है। यह रोग अक्सर मूंगफली की शुरुआती कीट समस्याओं के साथ-साथ आता है, इसलिए फसल की नियमित जाँच करें।
इस रोग से कितना नुकसान होता है?
- गंभीर प्रकोप में 28 से 50% उपज का नुकसान हो सकता है (ICAR, राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय)।
- बीजोपचार के बिना कुछ खेतों में 50% तक पौधे मर सकते हैं।
- संक्रमित फलियों की गुणवत्ता भी खराब होती है बाज़ार में कम भाव मिलता है।
- राजस्थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में यह रोग सबसे ज़्यादा नुकसान करता है।
इसीलिए इलाज से बेहतर है समय पर बचाव।
मूंगफली में कॉलर रॉट का नियंत्रण कैसे करें?
1. खेती से बचाव (Cultural)
- फसल चक्र अपनाएं मूंगफली के बाद मक्का या ज्वार बोएं।
- खेत से पुराने फसल अवशेष हटाकर नष्ट करें।
- मेड़ पर बुवाई करें ताकि पानी कॉलर के पास न रुके।
- बुवाई की गहराई 4–5 सेमी रखें ज़्यादा गहरी बुवाई न करें।
- प्रमाणित और रोगमुक्त बीज का उपयोग करें।
2. रासायनिक नियंत्रण स्टेज के हिसाब से स्प्रे शेड्यूल
सबसे असरदार तरीका है बुवाई से पहले बीजोपचार और उसके बाद तय समय पर 2 स्प्रे करना। नीचे शेड्यूल देखें:
| स्प्रे | समय | दवा (Molecule) | मात्रा |
|---|---|---|---|
| बीजोपचार | बुवाई से पहले | Kindle Carbendazim 46.27% SC | 1 ml / लीटर पानी |
| पहला | बुवाई के 20–25 दिन बाद | Safyra Tebuconazole 6.7% + Captan 26.9% SC | 1.5–2 ml / लीटर पानी |
| दूसरा | बुवाई के 35–40 दिन बाद या लक्षण दिखने पर | PUNCH Captan 70% + Hexaconazole 5% WP | 2 g / लीटर पानी |
बीजोपचार Carbendazim 46.27% SC (Kindle): बुवाई से पहले बीजों को Carbendazim के घोल में उपचारित करें। यह मिट्टी-जनित फफूंद को बीज के संपर्क में आने से रोकता है और अंकुरण सुधारता है।
पहला स्प्रे Tebuconazole 6.7% + Captan 26.9% SC (Safyra): रोग शुरू होने से पहले बचाव के लिए। Tebuconazole अंदर से और Captan बाहर से कॉलर क्षेत्र की रक्षा करता है। कॉलर ड्रेंच या पत्ती पर छिड़काव दोनों के लिए प्रभावी।
दूसरा स्प्रे Captan 70% + Hexaconazole 5% WP (PUNCH): रोग फैलने पर या मध्यम से गंभीर प्रकोप में। Hexaconazole प्रणालीगत रूप से Aspergillus niger को रोकता है।
टिप: स्प्रे साफ़ मौसम में करें। बारिश के तुरंत बाद या पहले स्प्रे न करें। दवा बदल-बदल कर डालें ताकि फफूंद में प्रतिरोध (resistance) न बने। पूरी रेंज देखें: मूंगफली के लिए फफूंदनाशक।
कॉलर रॉट से बचाव के उपाय (Prevention)
- खेत में जल निकासी अच्छी रखें, पानी न रुकने दें।
- पौधों के बीच सही दूरी रखें ताकि हवा लगे और नमी कम हो।
- संतुलित खाद डालें, ज़्यादा नाइट्रोजन से बचें।
- पहली बारिश के बाद फसल की नियमित जाँच करें।
- रोग दिखने का इंतज़ार न करें बुवाई के 20 दिन बाद पहला बचाव स्प्रे ज़रूर करें।
कॉलर रॉट के विस्तृत इलाज और अन्य फफूंद रोगों की जानकारी के लिए पढ़ें: मूंगफली में टिक्का रोग नियंत्रण गाइड।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. मूंगफली में कॉलर रॉट की पहचान कैसे करें?
जमीन से सटे तने के हिस्से (कॉलर क्षेत्र) पर भूरे रंग का धब्बा और नरम-सड़ा हुआ हिस्सा दिखे तो कॉलर रॉट है। कॉलर के पास काला चूर्ण जैसा फफूंद नज़र आता है और प्रभावित पौधा मुरझाकर गिर जाता है।
2. कॉलर रॉट और स्टेम रॉट में क्या अंतर है?
कॉलर रॉट में Aspergillus niger से काला चूर्ण जैसा फफूंद बनता है और यह अंकुर अवस्था में आता है। स्टेम रॉट (Sclerotium rolfsii) में सफेद धागेदार फफूंद और भूरे गोल दाने (sclerotia) दिखते हैं। दोनों अलग रोग हैं।
3. यह रोग किस मौसम में सबसे ज़्यादा फैलता है?
खरीफ मानसून में, जब मिट्टी का तापमान 28–35°C और नमी 80% से ज़्यादा हो। बुवाई के बाद पहले 30 दिन सबसे जोखिम भरे होते हैं।
4. बीजोपचार कब और कैसे करें?
बुवाई से ठीक पहले Carbendazim 46.27% SC (Kindle) के घोल में बीजों को उपचारित करें। यह कॉलर रॉट रोकने का सबसे सस्ता और सबसे प्रभावी तरीका है।
5. कॉलर रॉट की सबसे अच्छी दवा कौन सी है?
बुवाई से पहले Carbendazim बीजोपचार, फिर 20–25 दिन बाद Tebuconazole + Captan (Safyra) और ज़रूरत पड़ने पर Captan + Hexaconazole (PUNCH) का शेड्यूल सबसे असरदार है।
6. क्या यह रोग पैदावार घटाता है?
हाँ। गंभीर प्रकोप में समय पर न रोका जाए तो 28 से 50% तक उपज का नुकसान हो सकता है। ICAR और राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के अनुसार बीजोपचार के बिना कुछ खेतों में 50% पौधे मर जाते हैं।
सभी मूंगफली फफूंदनाशक देखें: Fungicides for Groundnut | मूंगफली में कीट नियंत्रण के लिए पढ़ें: मूंगफली में शुरुआती कीट नियंत्रण गाइड | मानसून स्प्रे शेड्यूल के लिए: मूंगफली में लीफ स्पॉट मानसून स्प्रे शेड्यूल